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mahabharat 8.56.63: उस महायुद्ध में कर्ण को पांचालों का संहार करते देख धर्मराज युधिष्ठिर अत्यन्त क्रोधित हो गये और उन्होंने उस पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.56.63 
पञ्चालानथ निघ्नन्तं कर्णं दृष्ट्वा महारणे।
अभ्यधावत् सुसंक्रुद्धो धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में कर्ण को पांचालों का संहार करते देख धर्मराज युधिष्ठिर अत्यन्त क्रोधित हो गये और उन्होंने उस पर आक्रमण कर दिया।
 
Seeing Karna killing the Panchalas in that great war, Dharmaraja Yudhishthira became very angry and attacked him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)