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mahabharat 8.56.56-57h: जैसे सिंह मृगों के बीच निर्भय होकर विचरण करता है, उसी प्रकार कर्ण भी पांचाल सेना के बीच निर्भय होकर विचरण करता था।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.56.56-57h 
मृगमध्ये यथा सिंहो दृश्यते निर्भयश्चरन्॥ ५६॥
पञ्चालानां तथा मध्ये कर्णोऽचरदभीतवत्।
 
 
अनुवाद
जैसे सिंह मृगों के बीच निर्भय होकर विचरण करता है, उसी प्रकार कर्ण भी पांचाल सेना के बीच निर्भय होकर विचरण करता था।
 
Just as a lion is seen moving fearlessly among a herd of deer, similarly Karna moved fearlessly among the army of the Panchalas. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)