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mahabharat 8.56.52-53h: कर्ण के बाणों से घायल होकर वे लोग युद्धस्थल में वज्र से घायल पर्वतों के समान नाना प्रकार की पीड़ा से चिल्लाते हुए गिर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  8.56.52-53h 
निपेतुरुर्व्यां समरे कर्णसायकताडिता:॥ ५२॥
कुर्वन्तो विविधान् नादान् वज्रनुन्ना इवाचला:।
 
 
अनुवाद
कर्ण के बाणों से घायल होकर वे लोग युद्धस्थल में वज्र से घायल पर्वतों के समान नाना प्रकार की पीड़ा से चिल्लाते हुए गिर रहे थे।
 
Being struck by Karna's arrows, they were falling down in the battle-field like mountains struck by thunderbolts, uttering various cries of pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)