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mahabharat 8.56.38-39h: उस समय शिनि के पौत्र सात्यकि ने तुरन्त ही कर्ण का पीछा किया और उसे अपने बाणों से घायल कर दिया, मानो कोई राजहासी हाथी किसी दूसरे राजहासी हाथी का पीछा कर रहा हो और उसकी जाँघों को अपने दाँतों से घायल कर रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  8.56.38-39h 
तं पृष्ठतोऽभ्ययात् तूर्णं शैनेयो वितुदञ्छरै:॥ ३८॥
वारणं जघनोपान्ते विषाणाभ्यामिव द्विप:।
 
 
अनुवाद
उस समय शिनि के पौत्र सात्यकि ने तुरन्त ही कर्ण का पीछा किया और उसे अपने बाणों से घायल कर दिया, मानो कोई राजहासी हाथी किसी दूसरे राजहासी हाथी का पीछा कर रहा हो और उसकी जाँघों को अपने दाँतों से घायल कर रहा हो।
 
At that time Satyaki, the grandson of Shini, immediately followed Karna, hurting him with his arrows, as if a king elephant were chasing another king elephant, wounding its thighs with its teeth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)