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mahabharat 8.56.36-37h: राजन! उसी समय दण्डधार धृष्टद्युम्न ने दण्ड धारण करने वाले राजा दुर्योधन को देखते ही देखते अपने रथ पर बिठा लिया और बिना किसी घबराहट के उसे युद्धभूमि से दूर ले गए।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  8.56.36-37h 
तमारोप्य रथे राजन् दण्डधारो नराधिपम्॥ ३६॥
अपाहरदसम्भ्रान्तो धृष्टद्युम्नस्य पश्यत:।
 
 
अनुवाद
राजन! उसी समय दण्डधार धृष्टद्युम्न ने दण्ड धारण करने वाले राजा दुर्योधन को देखते ही देखते अपने रथ पर बिठा लिया और बिना किसी घबराहट के उसे युद्धभूमि से दूर ले गए।
 
King! At that very moment, in front of the gaze of Dandadhar Dhrishtadyumna, the one holding the stick, made King Duryodhana sit on his chariot and took him away from the battlefield without any panic.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)