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mahabharat 8.56.32-33h: उनमें से पाँच बाणों से उसने दुर्योधन के सारथि और घोड़ों को मार डाला तथा एक बाण से उसका स्वर्ण-मंडित धनुष काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.56.32-33h 
ततो दुर्योधनस्याश्वान् हत्वा सूतं च पञ्चभि:॥ ३२॥
धनुश्चिच्छेद भल्लेन जातरूपपरिष्कृतम्।
 
 
अनुवाद
उनमें से पाँच बाणों से उसने दुर्योधन के सारथि और घोड़ों को मार डाला तथा एक बाण से उसका स्वर्ण-मंडित धनुष काट डाला।
 
With five of those arrows he killed Duryodhana's charioteer and horses, and with one arrow he cut off his golden-adorned bow. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)