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mahabharat 8.56.29-30h: राजा! धनुष कटते ही राजा दुर्योधन ने तुरन्त धृष्टद्युम्न की भौहों के बीच दस बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.56.29-30h 
अथैनं छिन्नधन्वानं त्वरमाणो महीपति:॥ २९॥
सायकैर्दशभी राजन् भ्रुवोर्मध्ये समार्पयत्।
 
 
अनुवाद
राजा! धनुष कटते ही राजा दुर्योधन ने तुरन्त धृष्टद्युम्न की भौहों के बीच दस बाण छोड़े।
 
King! When the bow was cut, King Duryodhana immediately shot ten arrows between the eyebrows of Dhrishtadyumna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)