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mahabharat 8.56.27-28h: महाराज! उस समय आपका पुत्र, जो अत्यन्त घायल हो गया था, वसन्त ऋतु में खिले हुए विशाल पलाश वृक्ष के समान अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  8.56.27-28h 
सोऽतिविद्धो महाराज पुत्रस्तेऽतिव्यराजत॥ २७॥
वसन्तकाले सुमहान् प्रफुल्ल इव किंशुक:।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय आपका पुत्र, जो अत्यन्त घायल हो गया था, वसन्त ऋतु में खिले हुए विशाल पलाश वृक्ष के समान अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।
 
Maharaj! At that time your son, who was badly injured, was looking very beautiful like a great Palaash tree blooming in the spring season. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)