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mahabharat 8.56.26-27h: वे बाण, जो शिला पर तीखे किये गये थे, तथा जिनमें कंकड और मोर के पंख लगे थे, राजा दुर्योधन के स्वर्ण कवच को छेदकर बड़े वेग से पृथ्वी में जा धंसे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  8.56.26-27h 
ते वर्म हेमविकृतं भित्त्वा राज्ञ: शिलाशिता:॥ २६॥
विविशुर्वसुधां वेगात् कङ्कबर्हिणवासस:।
 
 
अनुवाद
वे बाण, जो शिला पर तीखे किये गये थे, तथा जिनमें कंकड और मोर के पंख लगे थे, राजा दुर्योधन के स्वर्ण कवच को छेदकर बड़े वेग से पृथ्वी में जा धंसे।
 
Those arrows, sharpened on a rock and fitted with pebble feathers and peacock feathers, pierced the golden armour of King Duryodhana and entered the earth with great velocity. 26 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)