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mahabharat 8.56.17-18h: आपके पुत्र का पराक्रम देखकर सभी महारथी यह मानने लगे कि माद्री के दोनों पुत्र मरणासन्न हो गये हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  8.56.17-18h 
पराक्रमं तु तं दृष्ट्वा तव सूनोर्महारथा:॥ १७॥
मृत्योरुपान्तिकं प्राप्तौ माद्रीपुत्रौ स्म मेनिरे।
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र का पराक्रम देखकर सभी महारथी यह मानने लगे कि माद्री के दोनों पुत्र मरणासन्न हो गये हैं।
 
Seeing the valour of your son, all the mighty warriors began to believe that both the sons of Madri were near death. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)