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mahabharat 8.56.16-17h: उस समय जब आकाश बाणों से आच्छादित था, नकुल और सहदेव ने आपके पुत्र का रूप काल, अन्तक और यमराज के समान भयंकर देखा।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.56.16-17h 
बाणभूते ततस्तस्मिन् संछन्ने च नभस्तले॥ १६॥
यमाभ्यां ददृशे रूपं कालान्तकयमोपमम्।
 
 
अनुवाद
उस समय जब आकाश बाणों से आच्छादित था, नकुल और सहदेव ने आपके पुत्र का रूप काल, अन्तक और यमराज के समान भयंकर देखा।
 
At that time when the sky was covered with arrows, Nakula and Sahadeva saw your son's form as dreadful as that of Kala, Antaka and Yamaraja.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)