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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  8.56.15-16h 
धनुर्मण्डलमेवास्य दृश्यते युधि भारत।
सायकाश्चैव दृश्यन्ते निश्चरन्त: समन्तत:॥ १५॥
आच्छादयन् दिश: सर्वा: सूर्यस्येवांशवो यथा।
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय केवल उनका गोलाकार धनुष ही दिखाई दे रहा था और उससे छोड़े हुए बाण सूर्य की किरणों के समान सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित करते हुए दिखाई दे रहे थे॥ 15 1/2॥
 
Bhaarat! At that time only his circular bow was visible and the arrows released from it were visible covering all directions like the rays of the sun.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)