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mahabharat 8.56.142-143: भरत! उसी समय शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने आपके वीर पुत्र के सामने ही आपकी सेना के सैकड़ों और हजारों योद्धाओं को मार डाला॥142-143॥   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 142-143
 
 
श्लोक  8.56.142-143 
एतस्मिन्नेव काले च विजय: शत्रुतापन:॥ १४२॥
व्यहनत् तावकं सैन्यं शतशोऽथ सहस्रश:।
पश्यतस्तस्य वीरस्य तव पुत्रस्य भारत॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
भरत! उसी समय शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने आपके वीर पुत्र के सामने ही आपकी सेना के सैकड़ों और हजारों योद्धाओं को मार डाला॥142-143॥
 
Bhaarata! At this very time Arjuna, the tormentor of enemies, killed hundreds and thousands of warriors of your army right in front of your valiant son.॥ 142-143॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)