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mahabharat 8.56.138: भरतश्रेष्ठ! कुन्तीपुत्र! मेरे गुरु का पुत्र समझकर उसकी उपेक्षा मत करो। यह उसकी उपेक्षा करने का समय नहीं है।॥138॥   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  8.56.138 
गुरुपुत्र इति ह्येनं मानयन् भरतर्षभ।
उपेक्षां कुरु मा पार्थ नायं काल उपेक्षितुम्॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कुन्तीपुत्र! मेरे गुरु का पुत्र समझकर उसकी उपेक्षा मत करो। यह उसकी उपेक्षा करने का समय नहीं है।॥138॥
 
‘Bhaarat's best! Kunti's son! Do not ignore him thinking that he is my teacher's son. This is not the time to ignore him.'॥ 138॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)