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mahabharat 8.56.133-134h: महाराज! वह युद्धभूमि में अश्वत्थामा और अर्जुन की ओर बार-बार देखने लगा, क्रोध से लम्बी साँसें लेने लगा और उसकी आँखें जलने लगीं। 133 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 133-134h
 
 
श्लोक  8.56.133-134h 
स रोषान्नि:श्वसन् राजन् निर्दहन्निव चक्षुषा॥ १३३॥
द्रौणिं ह्यपश्यत् संग्रामे फाल्गुनं च मुहुर्मुहु:।
 
 
अनुवाद
महाराज! वह युद्धभूमि में अश्वत्थामा और अर्जुन की ओर बार-बार देखने लगा, क्रोध से लम्बी साँसें लेने लगा और उसकी आँखें जलने लगीं। 133 1/2
 
King! He started looking repeatedly at Ashwatthama and Arjuna on the battlefield, taking long breaths in anger and burning his eyes. 133 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)