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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  8.56.128 
द्रौणेस्तु धनुष: शब्दमहितत्रासनं रणे।
अश्रौषं बहुशो राजन् सिंहस्य निनदो यथा॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैंने युद्धस्थल में अश्वत्थामा के धनुष की टंकार बार-बार सुनी, जिससे शत्रु भयभीत हो गए, मानो वह सिंह की दहाड़ हो।
 
Maharaj! I repeatedly heard the twang of Ashwatthama's bow on the battlefield, which frightened the enemies, as if it was the roar of a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)