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mahabharat 8.56.124: तत्पश्चात् प्रतापी अश्वत्थामा ने सैकड़ों तीखे बाणों द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों को युद्धस्थल में ही निष्प्राण कर दिया॥124॥   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  8.56.124 
तत: शरशतैस्तीक्ष्णैरश्वत्थामा प्रतापवान्।
निश्चेष्टौ तावुभौ युद्धे चक्रे माधवपाण्डवौ॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रतापी अश्वत्थामा ने सैकड़ों तीखे बाणों द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों को युद्धस्थल में ही निष्प्राण कर दिया॥124॥
 
After that, the glorious Ashwatthama made both Shri Krishna and Arjun inanimate in the battlefield with hundreds of sharp arrows. 124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)