श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  8.56.123 
तै: पतद्भिर्महाराज द्रौणिमुक्तै: समन्तत:।
संछादितौ रथस्थौ तावुभौ कृष्णधनंजयौ॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! अश्वत्थामा के हाथों से छूटकर जो बाण सब दिशाओं में गिरे, उनसे रथ पर बैठे हुए श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों ही आच्छादित हो गए॥123॥
 
Maharaj! Both Shri Krishna and Arjuna, who were sitting in the chariot, were covered by those arrows which were released from Ashvatthama's hands and fell in all directions.॥ 123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)