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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना
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श्लोक 122
श्लोक
8.56.122
स दृष्ट्वैव तु दाशार्हं स्यन्दनस्थं विशाम्पते।
पुन: प्रासृजदुग्राणि शरवर्षाणि मारिष॥ १२२॥
अनुवाद
हे प्रजानाथ! रथ पर बैठे हुए श्रीकृष्ण को देखते ही वह पुनः उन पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा ॥122॥
Respected Prajanath! Just looking at Shri Krishna seated on the chariot, he once again began showering terrible arrows upon him. ॥122॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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