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mahabharat 8.56.121: महाराज! तत्पश्चात् उसने समूह बनाकर भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। उसके द्वारा छोड़े गए बाणों से व्याकुल होकर पाण्डव सेना भागने लगी। 121.   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  8.56.121 
तत: प्रासृजदुग्राणि शरवर्षाणि संघश:।
तैर्विसृष्टैर्महाराज व्यद्रवत् पाण्डवी चमू:॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् उसने समूह बनाकर भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। उसके द्वारा छोड़े गए बाणों से व्याकुल होकर पाण्डव सेना भागने लगी। 121.
 
Maharaj! Thereafter he started raining fierce arrows in groups. Troubled by the arrows fired by him, the Pandava army started running away. 121.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)