Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.56.120: उस समय क्रोध और आक्रोश से उसका मुख खुला हुआ था, उसकी आंखें रक्त से भरी हुई थीं और वह शक्तिशाली अश्वत्थामा मृत्यु के समय किंकर नामक दंड लिए हुए क्रोधित यमराज के समान प्रतीत हो रहा था। | mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय क्रोध और आक्रोश से उसका मुख खुला हुआ था, उसकी आंखें रक्त से भरी हुई थीं और वह शक्तिशाली अश्वत्थामा मृत्यु के समय किंकर नामक दंड लिए हुए क्रोधित यमराज के समान प्रतीत हो रहा था।
At that time his mouth was open in rage and resentment, his eyes were bloodshot and that powerful Ashwatthama appeared like an enraged Yamaraja holding a stick called Kinkar at the time of his death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥