Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.56.115-116h: हे प्रजानाथ! सम्पूर्ण युद्धभूमि काबुली घोड़ों, यवनों और शकों के रक्त से लाल हो गई थी, जो प्रत्येक बाण से मारे जा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 115-116h
 
 
श्लोक  8.56.115-116h 
एकेषुनिहतैरश्वै: काम्बोजैर्यवनै: शकै:॥ ११५॥
शोणिताक्तैस्तदा रक्तं सर्वमासीद् विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! सम्पूर्ण युद्धभूमि काबुली घोड़ों, यवनों और शकों के रक्त से लाल हो गई थी, जो प्रत्येक बाण से मारे जा रहे थे।
 
O Prajanath! The entire battlefield had become red with the blood of the Kabuli horses, Yavanas and Shakas who were killed by each arrow. 115 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)