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mahabharat 8.56.102: तत्पश्चात् किरीटधारी अर्जुन द्वारा छोड़े गए बिजली के समान चमकते हुए स्वर्णमय बाणों से आकाश भर गया ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  8.56.102 
ततो विद्युत्प्रभैर्बाणै: कार्तस्वरविभूषितै:।
निरन्तरमिवाकाशमासीच्छन्नं किरीटिना॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् किरीटधारी अर्जुन द्वारा छोड़े गए बिजली के समान चमकते हुए स्वर्णमय बाणों से आकाश भर गया ॥102॥
 
Thereafter the sky was filled with golden arrows, shining like lightning, fired by the crowned Arjuna. 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)