श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  8.55.d3 
न हि वै पार्षतं दृष्ट्वा समरे शत्रुसूदनम्।
भवेत् तव बलं किंचिद् ब्रवीमि त्वा न तु द्विजम्॥ )
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में शत्रुसूदन धृष्टद्युम्न को देखकर तुम्हारी शक्ति व्यर्थ हो जाएगी। (तुम्हारे कर्मों को देखकर) मैं तुम्हें ब्राह्मण नहीं कहूँगा।
 
Seeing Shatrusudan Dhrishtadyumna in the battlefield, your strength will be of no avail. (Seeing your deeds) I will not call you a Brahmin.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd