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mahabharat 8.55.9-10h: महाराज! द्रोणपुत्र की चपलता देखकर वहाँ खड़े हुए सभी महारथी राजा आश्चर्यचकित हो गये और तपते हुए सूर्य के समान तेजस्वी अश्वत्थामा की ओर देख भी न सके।   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  8.55.9-10h 
लाघवं द्रोणपुत्रस्य दृष्ट्वा तत्र महारथा:।
व्यस्मयन्त महाराज न चैनं प्रत्युदीक्षितुम्॥ ९॥
शेकुस्ते सर्वराजानस्तपन्तमिव भास्करम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणपुत्र की चपलता देखकर वहाँ खड़े हुए सभी महारथी राजा आश्चर्यचकित हो गये और तपते हुए सूर्य के समान तेजस्वी अश्वत्थामा की ओर देख भी न सके।
 
Maharaj! Seeing the agility of Drona's son, all the great warrior kings standing there were astonished and could not even look at Ashvatthama who was as radiant as the scorching sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)