vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना
»
श्लोक 6
श्लोक
8.55.6
तेनच्छन्नं नभो राजन् बाणजालेन भास्वता।
अभ्रच्छायेव संजज्ञे बाणरुद्धे नभस्तले॥ ६॥
अनुवाद
महाराज! सारा आकाश उन चमकते हुए बाणों से आच्छादित हो गया था। बाणों से आच्छादित आकाश बादलों की छाया के समान हो गया था।
King! The entire sky was covered with those shining arrows. The sky blocked by the arrows had become like the shadow of clouds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×