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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना
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श्लोक 39
श्लोक
8.55.39
ततो युधिष्ठिरो राजंस्त्यक्त्वा द्रौणिं महाहवे।
प्रययौ तावकं सैन्यं युक्त: क्रूराय कर्मणे॥ ३९॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उस महायुद्ध में अश्वत्थामा को छोड़कर युधिष्ठिर पुनः क्रूर कर्म करने के लिए आपकी सेना की ओर बढ़े।
O Lord of men! Then in that great war, leaving Ashvatthama behind, Yudhishthira again proceeded towards your army to commit cruel acts.
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि पार्थापयाने पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरका पलायनविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ४२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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