श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  8.55.34-35h 
मिषतस्ते महाबाहो युधि जेष्यामि कौरवान्॥ ३४॥
कुरुष्व समरे कर्म ब्रह्मबन्धुरसि ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
महाबाहो! आज मैं तुम्हारे सामने ही कौरवों को युद्ध में परास्त करूँगा। तुम्हें युद्ध में अपना पराक्रम दिखाना चाहिए। तुम निश्चय ही एक ब्राह्मण हो जिसने अपने धर्म का उल्लंघन किया है। 34 1/2
 
Mahabaho! Today I will defeat the Kauravas in battle right in front of you. You should display your valour in the war. You are certainly a brahmin who has violated his religion. 34 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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