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mahabharat 8.55.31-32h: तत्पश्चात् द्रोण के शिष्य महारथी युधिष्ठिर ने क्रोध और क्रोध में भरकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा से कहा।   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  8.55.31-32h 
युधिष्ठिरस्तु त्वरितो द्रोणशिष्यो महारथ:॥ ३१॥
अब्रवीद् द्रोणपुत्राय रोषामर्षसमन्वित:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोण के शिष्य महारथी युधिष्ठिर ने क्रोध और क्रोध में भरकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा से कहा।
 
Thereafter, Drona's disciple, the great warrior Yudhishthira, filled with rage and anger, said to Drona's son Ashwatthama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)