श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  8.55.30-31h 
दृष्ट्वा चैव महाराज द्रोणपुत्रपराक्रमम्॥ ३०॥
निहतान् मेनिरे सर्वान् पाण्डून् द्रोणसुतेन वै।
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणपुत्र का पराक्रम देखकर सबने सोचा कि द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के हाथों सभी पाण्डव मारे जायेंगे।
 
Maharaj! Seeing the valour of Drona's son, everyone thought that all the Pandavas will be killed by Drona's son Ashwatthama. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)