Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.55.29-30h: हे भरतश्रेष्ठ! जिस प्रकार मदमस्त मछली नदी के प्रवाह को बाधित कर देती है, उसी प्रकार द्रोणपुत्र के कारण पाण्डव सेना व्याकुल हो गयी।   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.55.29-30h 
तद् बलं पाण्डुपुत्रस्य द्रोणपुत्रप्रतापितम्॥ २९॥
चुक्षुभे भरतश्रेष्ठ तिमिनेव नदीमुखम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जिस प्रकार मदमस्त मछली नदी के प्रवाह को बाधित कर देती है, उसी प्रकार द्रोणपुत्र के कारण पाण्डव सेना व्याकुल हो गयी।
 
O best of the Bharatas! Just as a fish in a trance disturbs the flow of a river, in the same manner the Pandava army was agitated by Drona's son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)