vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना
»
श्लोक 26-27h
श्लोक
8.55.26-27h
युधिष्ठिरपुरोगास्तु द्रौणिं शस्त्रभृतां वरम्॥ २६॥
अभ्यवर्षन्त वेगेन विसृजन्त: शितान् शरान्।
अनुवाद
युधिष्ठिर आदि पाण्डव योद्धा शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा पर बड़े वेग से तीखे बाणों की वर्षा करने लगे।
The Pandava warriors like Yudhishthira etc. began to shower sharp arrows with great speed on Ashwatthama, the best among the weapon holders.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×