श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  8.55.26-27h 
युधिष्ठिरपुरोगास्तु द्रौणिं शस्त्रभृतां वरम्॥ २६॥
अभ्यवर्षन्त वेगेन विसृजन्त: शितान् शरान्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर आदि पाण्डव योद्धा शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा पर बड़े वेग से तीखे बाणों की वर्षा करने लगे।
 
The Pandava warriors like Yudhishthira etc. began to shower sharp arrows with great speed on Ashwatthama, the best among the weapon holders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)