श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.55.24-25h 
अथान्यद् धनुरादाय द्रोणपुत्र: प्रतापवान्॥ २४॥
शैनेयं शरवर्षेणच्छादयामास भारत।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोणपुत्र महाप्रतापी ने दूसरा धनुष लेकर मेघों की वर्षा से सात्यकि को आच्छादित कर दिया ॥24 1/2॥
 
India After that, the glorious son of Drona took the second bow and covered Satyaki with the rain of clouds. 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)