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mahabharat 8.55.22-23h: इसके बाद सात्यकि ने कुपित होकर रणभूमि में आक्रमण करने वाले अश्वत्थामा के धनुष को तीक्ष्ण अर्धचन्द्र से काट डाला और बड़े जोर से गर्जना की। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  8.55.22-23h 
सात्यकिस्तु तत: क्रुद्धो द्रौणे: प्रहरतो रणे॥ २२॥
अर्धचन्द्रेण तीक्ष्णेन धनुश्छित्त्वानदद् भृशम्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद सात्यकि ने कुपित होकर रणभूमि में आक्रमण करने वाले अश्वत्थामा के धनुष को तीक्ष्ण अर्धचन्द्र से काट डाला और बड़े जोर से गर्जना की। 22 1/2॥
 
After this, Satyaki, enraged, cut the bow of Ashwatthama, who was attacking in the battlefield, with a sharp crescent moon and roared loudly. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)