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mahabharat 8.55.20-21h: तत्पश्चात्, द्रोणपुत्र ने, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त था, धर्मराज का धनुष काट डाला और हँसते हुए उसे पुनः तीन बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  8.55.20-21h 
तत: पुनरमेयात्मा धर्मराजस्य कार्मुकम्॥ २०॥
द्रौणिश्चिच्छेद विहसन् विव्याध च शरैस्त्रिभि:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, द्रोणपुत्र ने, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त था, धर्मराज का धनुष काट डाला और हँसते हुए उसे पुनः तीन बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter, Drona's son, endowed with immense self-confidence, cut off Dharmaraja's bow and smilingly wounded him again with three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)