Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.55.2-3: वह महान् अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग में निपुण था; इसलिए उसने तेज हाथों वाले योद्धा के समान सान पर तीखे किए हुए सुवर्णमय पंखों वाले भयंकर बाणों की वर्षा की और नाना प्रकार के मार्ग और विद्याओं का प्रदर्शन करते हुए दिव्यास्त्रों से अभिमंत्रित बाणों द्वारा युद्धस्थल में युधिष्ठिर को रोक दिया और उन बाणों से आकाश को भर दिया॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह महान् अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग में निपुण था; इसलिए उसने तेज हाथों वाले योद्धा के समान सान पर तीखे किए हुए सुवर्णमय पंखों वाले भयंकर बाणों की वर्षा की और नाना प्रकार के मार्ग और विद्याओं का प्रदर्शन करते हुए दिव्यास्त्रों से अभिमंत्रित बाणों द्वारा युद्धस्थल में युधिष्ठिर को रोक दिया और उन बाणों से आकाश को भर दिया॥2-3॥
He was an expert in the use of the greatest weapons; therefore, like a warrior with swift hands, he showered fierce arrows with golden feathers, sharpened on the whetstones, and demonstrating various kinds of paths and teachings, he obstructed Yudhishthira in the battlefield with arrows enchanted by divine weapons and filled the sky with those arrows.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥