श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  8.55.19-20h 
ततो द्रौणिर्महाराज शरवर्षेण मारिष॥ १९॥
छादयामास तत् सैन्यं समन्ताद् भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
पूज्य भारतभूषण महाराज! तत्पश्चात् द्रोणकुमार ने अपने बाणों की वर्षा से युधिष्ठिर की सेना को चारों ओर से आच्छादित कर दिया। 19 1/2॥
 
Respected Bharatbhushan Maharaj! After that, Drona Kumar covered Yudhishthira's army from all sides with the rain of his arrows. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)