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mahabharat 8.55.18-19h: तब महारथी श्रुतकीर्ति ने दूसरा धनुष लेकर द्रोणपुत्र को पहले तीन बाणों से तथा फिर अन्य तीखे बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  8.55.18-19h 
अथान्यद् धनुरादाय श्रुतिकीर्तिर्महारथ:॥ १८॥
द्रौणायनिं त्रिभिर्विद्‍ध्वा विव्याधान्यै: शितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
तब महारथी श्रुतकीर्ति ने दूसरा धनुष लेकर द्रोणपुत्र को पहले तीन बाणों से तथा फिर अन्य तीखे बाणों से घायल कर दिया।
 
Then the great warrior Shrutakirti took another bow and pierced Drona's son first with three arrows and then with other sharp arrows. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)