श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 16-18h
 
 
श्लोक  8.55.16-18h 
श्रुतकीर्तिं च नवभि: सुतसोमं च पञ्चभि:।
अष्टभि: श्रुतकर्माणं प्रतिविन्ध्यं त्रिभि: शरै:॥ १६॥
शतानीकं च नवभिर्धर्मपुत्रं च पञ्चभि:।
तथेतरांस्तत: शूरान् द्वाभ्यां द्वाभ्यामताडयत् ॥ १७॥
श्रुतकीर्तेस्तथा चापं चिच्छेद निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने श्रुतकीर्ति को नौ बाणों से, सुतसोम को पाँच बाणों से, श्रुतकर्मा को आठ बाणों से, प्रतिविन्ध्य को तीन बाणों से, शतानीक को नौ बाणों से, धर्मपुत्र युधिष्ठिर को पाँच बाणों से तथा अन्य वीर योद्धाओं को दो-दो बाणों से घायल कर दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने तीखे बाणों से श्रुतकीर्ति के धनुष को भी काट डाला।
 
Then he hit Shrutkirti with nine arrows, Sutasoma with five arrows, Shrutkarma with eight arrows, Prativindhya with three arrows, Shatanik with nine arrows, Dharmaputra Yudhishthira with five arrows and other brave warriors with two arrows each. Besides this, he also cut Shrutkirti's bow with sharp arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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