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mahabharat 8.55.15: राजन! तब क्रोध में भरकर विषैले सर्प के समान फुंफकारते हुए अश्वत्थामा ने सात्यकि को पच्चीस बाणों से घायल करके बदला लिया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 55: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.55.15 
स तु क्रुद्धस्ततो राजन्नाशीविष इव श्वसन्।
सात्यकिं पञ्चविंशत्या प्रत्यविध्यच्छिलीमुखै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब क्रोध में भरकर विषैले सर्प के समान फुंफकारते हुए अश्वत्थामा ने सात्यकि को पच्चीस बाणों से घायल करके बदला लिया॥15॥
 
Rajan! Then, filled with anger and hissing like a poisonous snake, Ashwatthama took revenge by wounding Satyaki with twenty-five arrows. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)