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mahabharat 8.54.7: तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए शिखण्डी ने रणभूमि में कुपित कृपाचार्य को कंकणयुक्त सात सीधे बाणों से क्षत-विक्षत कर दिया॥7॥   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.54.7 
तत: शिखण्डी कुपित: शरै: सप्तभिराहवे।
कृपं विव्याध कुपितं कङ्कपत्रैरजिह्मगै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए शिखण्डी ने रणभूमि में कुपित कृपाचार्य को कंकणयुक्त सात सीधे बाणों से क्षत-विक्षत कर दिया॥7॥
 
Thereafter, Shikhandi, filled with anger, mutilated the enraged Kripacharya in the battlefield with seven straight arrows tipped with pebbles. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)