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mahabharat 8.54.6: अस्त्र-शस्त्र के महापंडित कृपाचार्य ने क्रोधित होकर शिखंडी के बाणों की वर्षा को रोक दिया और उसे दस बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.54.6 
कृपस्तु शरवर्षं तद् विनिहत्य महास्त्रवित्।
शिखण्डिनं रणे क्रुद्धो विव्याध दशभि: शरै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अस्त्र-शस्त्र के महापंडित कृपाचार्य ने क्रोधित होकर शिखंडी के बाणों की वर्षा को रोक दिया और उसे दस बाणों से घायल कर दिया।
 
Enraged, the great expert in weapons Kripacharya warded off Shikhandi's shower of arrows and wounded him with ten arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)