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mahabharat 8.54.31: उधर महाबली कृतवर्मा ने युद्धस्थल में धृष्टद्युम्न को रोककर बड़े हर्ष से कहा - "खड़े रहो, खड़े रहो।" ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.54.31 
धृष्टद्युम्नं तु समरे संनिवार्य महारथ:।
कृतवर्माब्रवीद्‍धृष्टस्तिष्ठ तिष्ठेति भारत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उधर महाबली कृतवर्मा ने युद्धस्थल में धृष्टद्युम्न को रोककर बड़े हर्ष से कहा - "खड़े रहो, खड़े रहो।" ॥31॥
 
On the other hand, the mighty warrior Kritavarman stopped Dhrishtadyumna in the battlefield and said with great joy, "Stand, stand." ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)