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mahabharat 8.54.30: महाराज! सुकेतु के मारे जाने पर उसके अग्रिम सैनिक भयभीत हो गए और कृपाचार्य को युद्धभूमि में छोड़कर चारों ओर भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.54.30 
तस्मिन् हते महाराज त्रस्तास्तस्य पुरोगमा:।
गौतमं समरे त्यक्त्वा दुद्रुवुस्ते दिशो दश॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सुकेतु के मारे जाने पर उसके अग्रिम सैनिक भयभीत हो गए और कृपाचार्य को युद्धभूमि में छोड़कर चारों ओर भाग गए।
 
Maharaj! After Suketu was killed, his front line soldiers became frightened and abandoned Krupacharya in the battlefield and fled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)