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mahabharat 8.54.28: उसी क्षण कृपाचार्य ने एक धार से सुकेतु का सिर, उसकी पगड़ी और कुण्डलों से चमकते हुए मुकुट को उसके कांपते हुए शरीर से काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.54.28 
चलतस्तस्य कायात् तु शिरो ज्वलितकुण्डलम्।
सोष्णीषं सशिरस्त्राणं क्षुरप्रेण त्वपातयद्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसी क्षण कृपाचार्य ने एक धार से सुकेतु का सिर, उसकी पगड़ी और कुण्डलों से चमकते हुए मुकुट को उसके कांपते हुए शरीर से काट डाला।
 
At that very moment, with a razor's blade, Krupacharya cut off Suketu's head along with his turban and helmet, glittering with earrings, from his quivering body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)