Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.54.20: महाराज! जैसे रोगी मरणासन्न हो जाता है, उसी प्रकार कृपाचार्य के वश में रहने वाला शिखण्डी ढाल कट जाने पर केवल तलवार हाथ में लेकर उनकी ओर दौड़ा। | mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विचर्मा महाराज खड्गपाणिरुपाद्रवत्।
कृपस्य वशमापन्नो मृत्योरास्यमिवातुर:॥ २०॥
अनुवाद
महाराज! जैसे रोगी मरणासन्न हो जाता है, उसी प्रकार कृपाचार्य के वश में रहने वाला शिखण्डी ढाल कट जाने पर केवल तलवार हाथ में लेकर उनकी ओर दौड़ा।
Maharaj! Just as a patient is on the verge of death, similarly Shikhandi who was under the control of Kripacharya ran towards him with only a sword in his hand after his shield was cut.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥