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mahabharat 8.54.19: हे भरतपुत्र! तब कृपाचार्य ने तुरन्त ही अपने बाणों से शिखण्डी की ढाल को, जिस पर सौ चन्द्रमा के चिह्न थे, चकनाचूर कर दिया। इससे सब लोग जयजयकार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.54.19 
शतचन्द्रं च तच्चर्म गौतमस्तस्य भारत।
व्यधमत् सायकैस्तूर्णं तत उच्चुक्रुशुर्जना:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! तब कृपाचार्य ने तुरन्त ही अपने बाणों से शिखण्डी की ढाल को, जिस पर सौ चन्द्रमा के चिह्न थे, चकनाचूर कर दिया। इससे सब लोग जयजयकार करने लगे।
 
O son of Bharata! Then Kripacharya instantly shattered Shikhandi's shield with his arrows which had hundred moon-shaped marks on it. This made everyone shout.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)