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mahabharat 8.54.18: शिखण्डी ने अपनी तलवार बार-बार घुमाई और उसके द्वारा छोड़े गए सभी स्वर्ण-जटित बाणों को काट डाला। 18.   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.54.18 
ताञ्छरान् प्रेषितांस्तेन समन्तात् स्वर्णभूषितान्।
चिच्छेद खड्गमाविध्य भ्रामयंश्च पुन: पुन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शिखण्डी ने अपनी तलवार बार-बार घुमाई और उसके द्वारा छोड़े गए सभी स्वर्ण-जटित बाणों को काट डाला। 18.
 
Shikhandi swung his sword again and again and cut all the gold-adorned arrows shot by him. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)