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mahabharat 8.54.11: महाराज! शिखंडी युद्धभूमि में निश्चल खड़ा था। हमने वहाँ एक आश्चर्यजनक वस्तु देखी, मानो कोई पत्थर तैर रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 8.54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 54: कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय और सुकेतुका वध तथा धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्माका परास्त होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.54.11 
तत्राद्भुतमपश्याम शिलानां प्लवनं यथा।
निश्चेष्टस्तद् रणे राजन् शिखण्डी समतिष्ठत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शिखंडी युद्धभूमि में निश्चल खड़ा था। हमने वहाँ एक आश्चर्यजनक वस्तु देखी, मानो कोई पत्थर तैर रहा हो।
 
King! Shikhandi stood motionless on the battlefield. We saw an astonishing thing, like a stone floating there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)