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mahabharat 8.53.45-46h: संशप्तकों ने पुनः यह निश्चय कर लिया कि या तो वे मर जायेंगे या विजय प्राप्त करेंगे, किन्तु युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे, उन्होंने अर्जुन को चारों ओर से घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  8.53.45-46h 
तत: संशप्तका भूय: परिवव्रुर्धनंजयम्॥ ४५॥
मर्तव्यमिति निश्चित्य जयं वाप्यनिवर्तनम्।
 
 
अनुवाद
संशप्तकों ने पुनः यह निश्चय कर लिया कि या तो वे मर जायेंगे या विजय प्राप्त करेंगे, किन्तु युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे, उन्होंने अर्जुन को चारों ओर से घेर लिया।
 
The Samshaptakas once again, having resolved that they would either die or achieve victory, but would not retreat from the battle, surrounded Arjuna from all sides. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)